गाँव की रहस्यमयी कहानी की लेखन -- 2
Budget: ₹750 – ₹1,250 INR
यह कहानी एक छोटे से गाँव के एक युवक की है, जो एक रात अपने घर लौट रहा था। वह गाँव के बाहर से होकर गुजरने वाली सुनसान सड़क से अपने घर की ओर जा रहा था। रात का समय था और पूरा इलाका सन्नाटे में डूबा हुआ था। उसकी अकेली कदमों की आवाज़ गूंज रही थी।
वह जैसे ही एक पुराने बरगद के पेड़ के पास से गुजरा, उसकी नज़र कुछ खून से सने हुए वस्त्रों पर पड़ी। उसे लगा कि यह किसी दुर्घटना का निशान हो सकता है, लेकिन उसने इसे ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया और तेजी से वहाँ से निकलने की कोशिश की।
परंतु तभी उसने कुछ और देखा। पेड़ के नीचे एक कटा हुआ मानव हाथ पड़ा था, जो खून से सना हुआ था। युवक डर के बजाय थोड़ी देर के लिए हैरान रह गया। वह सोचने लगा कि यह हाथ यहाँ कैसे आया होगा? क्या कोई हत्या हुई है? या फिर यह किसी दुर्घटना का परिणाम है?
वह हाथ को उठाने के लिए झुका ही था कि अचानक उसे एक कटी हुई आवाज़ सुनाई दी, "क्या तुमने मेरा हाथ उठा लिया?"
युवक ने पीछे मुड़कर देखा, लेकिन वहाँ कोई नहीं था। उसकी धड़कन तेज़ हो गई, और वह डर के मारे कांपने लगा। वह फिर से हाथ को छोड़ने ही वाला था कि फिर वही आवाज़ सुनाई दी, "तुमने मेरा हाथ उठाया है, अब तुम मेरे साथ हो।"
युवक ने तड़पते हुए हाथ को छोड़ दिया और तेजी से दौड़ने लगा। लेकिन जब वह कुछ कदम ही आगे बढ़ा, तो अचानक उसकी नजरें उस कटी हुई हाथ से लगी एक विकृत शख्सियत पर पड़ीं। यह वही हाथ का मालिक था। उसके शरीर से खून बह रहा था और उसका चेहरा विकृत और डरावना था।
उस विकृत शख्स ने कहा, "तुम मुझे छोड़ने नहीं जा रहे हो, अब तुम मेरे साथ हो।" और इस वाक्य के साथ उसने युवक को पकड़ लिया। युवक चीखते हुए भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन उसकी चीखें हवा में विलीन हो गईं। अगले दिन, गाँव वालों ने देखा कि युवक का कोई सुराग नहीं था, लेकिन उसी रास्ते पर उसी विकृत व्यक्ति की मौजूदगी महसूस की गई।
कुछ दिन बाद, लोगों ने सुना कि जो भी उस रास्ते पर जाता, उसे उस विकृत आदमी की आवाज़ें सुनाई देती थीं। लोग अब उस रास्ते से गुजरने से डरते थे, क्योंकि वे जानते थे कि कटा हुआ हाथ अब अपने मालिक को ढूंढ चुका था।
वह जैसे ही एक पुराने बरगद के पेड़ के पास से गुजरा, उसकी नज़र कुछ खून से सने हुए वस्त्रों पर पड़ी। उसे लगा कि यह किसी दुर्घटना का निशान हो सकता है, लेकिन उसने इसे ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया और तेजी से वहाँ से निकलने की कोशिश की।
परंतु तभी उसने कुछ और देखा। पेड़ के नीचे एक कटा हुआ मानव हाथ पड़ा था, जो खून से सना हुआ था। युवक डर के बजाय थोड़ी देर के लिए हैरान रह गया। वह सोचने लगा कि यह हाथ यहाँ कैसे आया होगा? क्या कोई हत्या हुई है? या फिर यह किसी दुर्घटना का परिणाम है?
वह हाथ को उठाने के लिए झुका ही था कि अचानक उसे एक कटी हुई आवाज़ सुनाई दी, "क्या तुमने मेरा हाथ उठा लिया?"
युवक ने पीछे मुड़कर देखा, लेकिन वहाँ कोई नहीं था। उसकी धड़कन तेज़ हो गई, और वह डर के मारे कांपने लगा। वह फिर से हाथ को छोड़ने ही वाला था कि फिर वही आवाज़ सुनाई दी, "तुमने मेरा हाथ उठाया है, अब तुम मेरे साथ हो।"
युवक ने तड़पते हुए हाथ को छोड़ दिया और तेजी से दौड़ने लगा। लेकिन जब वह कुछ कदम ही आगे बढ़ा, तो अचानक उसकी नजरें उस कटी हुई हाथ से लगी एक विकृत शख्सियत पर पड़ीं। यह वही हाथ का मालिक था। उसके शरीर से खून बह रहा था और उसका चेहरा विकृत और डरावना था।
उस विकृत शख्स ने कहा, "तुम मुझे छोड़ने नहीं जा रहे हो, अब तुम मेरे साथ हो।" और इस वाक्य के साथ उसने युवक को पकड़ लिया। युवक चीखते हुए भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन उसकी चीखें हवा में विलीन हो गईं। अगले दिन, गाँव वालों ने देखा कि युवक का कोई सुराग नहीं था, लेकिन उसी रास्ते पर उसी विकृत व्यक्ति की मौजूदगी महसूस की गई।
कुछ दिन बाद, लोगों ने सुना कि जो भी उस रास्ते पर जाता, उसे उस विकृत आदमी की आवाज़ें सुनाई देती थीं। लोग अब उस रास्ते से गुजरने से डरते थे, क्योंकि वे जानते थे कि कटा हुआ हाथ अब अपने मालिक को ढूंढ चुका था।