Hindi Screenplay for "Andhere Ke Us Par" -- 2
Budget: ₹100 – ₹400 INR
आज का आर्यन (एक सफल व्यक्ति) मंच पर अपनी कहानी बयान करता है, और फिर अपने पिता से हुए एक तीखे संघर्ष, यानी बाप-बेटे की लड़ाई का दृश्य फ़्लैशबैक में आता है।
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फिल्म का नाम: अंधेरे के उस पार
भाग 1: मैं वही आर्यन हूँ…
(शैली: फ़्लैशबैक + बाप-बेटे की टक्कर)
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दृश्य 1 – वर्तमान (स्थान: मोटिवेशनल कॉन्फ़्रेंस, दिल्ली)
(एक बड़ा मंच, रोशनी से जगमगाता हुआ। हॉल में सैकड़ों युवा तालियाँ बजा रहे हैं। स्लाइड पर एक नाम उभरता है – "आर्यन वत्स: स्लम से स्टार्टअप तक")
होस्ट (मंच पर):
दोस्तों, आइए अब मिलते हैं उस इंसान से जिसने अंधेरे से निकलकर रौशनी की मिसाल कायम की... वो हैं – आर्यन वत्स!
(तालियाँ बजती हैं, आर्यन मंच पर आता है। सफ़ेद शर्ट, गंभीर चेहरा, आँखें थोड़ी नम। माइक पकड़ता है।)
आर्यन (धीरे से):
क्या आपने कभी सोचा है कि जब बाप और बेटा आमने-सामने खड़े हो जाएँ…
तो हार किसकी होती है?
(भीड़ शांत हो जाती है। कैमरा ज़ूम इन करता है उसके चेहरे पर।)
आर्यन (आगे कहता है):
मैं वो लड़का हूँ… जिसने अपने बाप से लड़ाई लड़ी…
ना सिर्फ़ शराब से, बल्कि हालात से… गरीबी से… और खुद से भी।
(धीरे-धीरे धुंध छाती है, फ़्लैशबैक शुरू होता है – 10 साल पहले।)
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दृश्य 2 – अतीत (स्थान: देहरादून की झुग्गी बस्ती, रात का समय)
(एक छोटा सा टीन की छत वाला घर। बाहर बारिश हो रही है। अंदर माँ रोटी पका रही है। बहन खाँस रही है।)
सरला (माँ) (चूल्हे पर झुकी हुई)
आर्यन, सीमा को दवा पिला दे बेटा... बुखार फिर बढ़ गया।
आर्यन (पढ़ाई छोड़कर उठते हुए):
हाँ माँ, मैं देखता हूँ।
(तभी दरवाज़ा धड़ाम से खुलता है। रामनाथ, शराब में चूर, अंदर आता है। कपड़े भीगे हुए। हाथ में अधूरी बोतल है।)
रामनाथ (बड़बड़ाता हुआ):
सब मेरी वजह से मर रहे हैं ना? लो पी लूं और खत्म हो जाऊँ…
सरला:
चुप रहिए! बच्चों के सामने तो कम से कम...
रामनाथ (चिल्लाता है):
तू मत सिखा मुझे! और तू आर्यन... तू क्या समझता है खुद को? बड़ा आदमी बन रहा है?
आर्यन (गुस्से में):
हाँ! बनूंगा बड़ा आदमी… ताकि तुम्हारे जैसे शराबी की वजह से माँ और बहन को कभी रोना ना पड़े।
रामनाथ (उंगली दिखाते हुए):
ज़ुबान लड़ाता है मुझसे?
आर्यन (आँखों में आँसू और गुस्सा दोनों):
आपने क्या किया है हमारे लिए? हर रात पीकर गालियाँ देना, माँ को मारना, बहन के इलाज के पैसे तक शराब में उड़ा देना… यही किया है ना?
रामनाथ:
मैं तेरा बाप हूँ!
आर्यन (चिल्लाकर):
आप बाप कहलाने लायक नहीं हैं!
(एक पल को सब सन्नाटा छा जाता है। सरला रो पड़ती है। सीमा डरकर कोने में दुबक जाती है। रामनाथ का चेहरा सुन्न हो जाता है। अचानक गुस्से में बोतल ज़मीन पर फेंक देता है – कांच टूटता है।)
रामनाथ:
निकालो इसे घर से! जा... जा बन जा बड़ा आदमी…
आर्यन:
जा रहा हूँ... लेकिन एक दिन जब लौटूँगा ना… तब इस घर की हालत, माँ की आँखें और बहन की दवा सब बदल चुका होगा…
(आर्यन तेज़ी से बाहर निकल जाता है। बारिश में भीगता हुआ। सरला उसका नाम पुकारती है, लेकिन वो नहीं रुकता।)
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दृश्य 3 – वर्तमान (फिर से मंच)
आर्यन (मुस्कुराकर कहता है):
वो रात मेरी ज़िंदगी की सबसे लंबी रात थी।
लेकिन उसी रात ने मुझे आदमी बनाया…
मुझे भूख दी, आग दी… और एक मकसद दिया।
(भीड़ भावुक हो जाती है। तालियाँ नहीं, एकदम सन्नाटा – लोग सोच में डूबे हैं।)आर्यन (धीरे से):
अगर आपके पास लड़ने के लिए कुछ है…
तो यक़ीन मानिए, आप ज़िंदा हैं।
(कैमरा फिर धीरे-धीरे अगले फ्लैशबैक की ओर जाता है – भाग 2 की तैयारी।)
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[भाग 1 समाप्त]
Contact me for part 2-5
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फिल्म का नाम: अंधेरे के उस पार
भाग 1: मैं वही आर्यन हूँ…
(शैली: फ़्लैशबैक + बाप-बेटे की टक्कर)
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दृश्य 1 – वर्तमान (स्थान: मोटिवेशनल कॉन्फ़्रेंस, दिल्ली)
(एक बड़ा मंच, रोशनी से जगमगाता हुआ। हॉल में सैकड़ों युवा तालियाँ बजा रहे हैं। स्लाइड पर एक नाम उभरता है – "आर्यन वत्स: स्लम से स्टार्टअप तक")
होस्ट (मंच पर):
दोस्तों, आइए अब मिलते हैं उस इंसान से जिसने अंधेरे से निकलकर रौशनी की मिसाल कायम की... वो हैं – आर्यन वत्स!
(तालियाँ बजती हैं, आर्यन मंच पर आता है। सफ़ेद शर्ट, गंभीर चेहरा, आँखें थोड़ी नम। माइक पकड़ता है।)
आर्यन (धीरे से):
क्या आपने कभी सोचा है कि जब बाप और बेटा आमने-सामने खड़े हो जाएँ…
तो हार किसकी होती है?
(भीड़ शांत हो जाती है। कैमरा ज़ूम इन करता है उसके चेहरे पर।)
आर्यन (आगे कहता है):
मैं वो लड़का हूँ… जिसने अपने बाप से लड़ाई लड़ी…
ना सिर्फ़ शराब से, बल्कि हालात से… गरीबी से… और खुद से भी।
(धीरे-धीरे धुंध छाती है, फ़्लैशबैक शुरू होता है – 10 साल पहले।)
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दृश्य 2 – अतीत (स्थान: देहरादून की झुग्गी बस्ती, रात का समय)
(एक छोटा सा टीन की छत वाला घर। बाहर बारिश हो रही है। अंदर माँ रोटी पका रही है। बहन खाँस रही है।)
सरला (माँ) (चूल्हे पर झुकी हुई)
आर्यन, सीमा को दवा पिला दे बेटा... बुखार फिर बढ़ गया।
आर्यन (पढ़ाई छोड़कर उठते हुए):
हाँ माँ, मैं देखता हूँ।
(तभी दरवाज़ा धड़ाम से खुलता है। रामनाथ, शराब में चूर, अंदर आता है। कपड़े भीगे हुए। हाथ में अधूरी बोतल है।)
रामनाथ (बड़बड़ाता हुआ):
सब मेरी वजह से मर रहे हैं ना? लो पी लूं और खत्म हो जाऊँ…
सरला:
चुप रहिए! बच्चों के सामने तो कम से कम...
रामनाथ (चिल्लाता है):
तू मत सिखा मुझे! और तू आर्यन... तू क्या समझता है खुद को? बड़ा आदमी बन रहा है?
आर्यन (गुस्से में):
हाँ! बनूंगा बड़ा आदमी… ताकि तुम्हारे जैसे शराबी की वजह से माँ और बहन को कभी रोना ना पड़े।
रामनाथ (उंगली दिखाते हुए):
ज़ुबान लड़ाता है मुझसे?
आर्यन (आँखों में आँसू और गुस्सा दोनों):
आपने क्या किया है हमारे लिए? हर रात पीकर गालियाँ देना, माँ को मारना, बहन के इलाज के पैसे तक शराब में उड़ा देना… यही किया है ना?
रामनाथ:
मैं तेरा बाप हूँ!
आर्यन (चिल्लाकर):
आप बाप कहलाने लायक नहीं हैं!
(एक पल को सब सन्नाटा छा जाता है। सरला रो पड़ती है। सीमा डरकर कोने में दुबक जाती है। रामनाथ का चेहरा सुन्न हो जाता है। अचानक गुस्से में बोतल ज़मीन पर फेंक देता है – कांच टूटता है।)
रामनाथ:
निकालो इसे घर से! जा... जा बन जा बड़ा आदमी…
आर्यन:
जा रहा हूँ... लेकिन एक दिन जब लौटूँगा ना… तब इस घर की हालत, माँ की आँखें और बहन की दवा सब बदल चुका होगा…
(आर्यन तेज़ी से बाहर निकल जाता है। बारिश में भीगता हुआ। सरला उसका नाम पुकारती है, लेकिन वो नहीं रुकता।)
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दृश्य 3 – वर्तमान (फिर से मंच)
आर्यन (मुस्कुराकर कहता है):
वो रात मेरी ज़िंदगी की सबसे लंबी रात थी।
लेकिन उसी रात ने मुझे आदमी बनाया…
मुझे भूख दी, आग दी… और एक मकसद दिया।
(भीड़ भावुक हो जाती है। तालियाँ नहीं, एकदम सन्नाटा – लोग सोच में डूबे हैं।)आर्यन (धीरे से):
अगर आपके पास लड़ने के लिए कुछ है…
तो यक़ीन मानिए, आप ज़िंदा हैं।
(कैमरा फिर धीरे-धीरे अगले फ्लैशबैक की ओर जाता है – भाग 2 की तैयारी।)
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[भाग 1 समाप्त]
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