It's a short story
Budget: ₹2,500 – ₹0 INR
चाचा और उनके पीए की बात सुनकर वेदांत डर तो गया ही था साथ ही वह सोच रहा था की अब वह क्या करे उसका क्या होगा उसका पूरा परिवार तो खत्म हो गया। वह यह सब सोच रहा ही होता है की अचानक वह देखता है की उसके चाचा और उसका पीए नीचे आ रहे थे। वह जल्दी से नीचे उतरने लगता है और बिना पीछे मुड़े दौड़ता रहता है जब तक वह थककर चूर नही हो जाता। वह रुक जाता है और सड़क किनारे रखे एक बेंच में बैठ जाता है। वह समझ ही नही पा रहा था की अचानक यह क्या से क्या हो गया एक पल में उसका हंसता खेलता परिवार खत्म हो गया।
वह यह जानता था की अब रोने से कुछ नहीं होने वाला और वह रोना बंद कर देता है मगर उसके आंखों से अभी भी आंसू बह रहे थे। वह सोचता है की था रहना अब सही नहीं है उसके चाचा को उसके बचने को खबर मिलने पर उसको जिंदा नहीं छोड़ते।
वह एक बार फिर खड़ा हो जाता है मगर इस बार एक अदम्य साहस के साथ वह रेल्वे स्टेशन की ओर दौड लगता है और पहुंचते ही वह एक ट्रेन में चढ़ जाता है। वह नही जानता था की यह ट्रेन
वह यह जानता था की अब रोने से कुछ नहीं होने वाला और वह रोना बंद कर देता है मगर उसके आंखों से अभी भी आंसू बह रहे थे। वह सोचता है की था रहना अब सही नहीं है उसके चाचा को उसके बचने को खबर मिलने पर उसको जिंदा नहीं छोड़ते।
वह एक बार फिर खड़ा हो जाता है मगर इस बार एक अदम्य साहस के साथ वह रेल्वे स्टेशन की ओर दौड लगता है और पहुंचते ही वह एक ट्रेन में चढ़ जाता है। वह नही जानता था की यह ट्रेन