आनंदी सोच और लिरिकल कवीता

Job ID: 40369293

Budget: ₹12,500 – ₹37,500 INR

बारिश की पहली बूँद;एक मोती

‎बारिश की पहली बूँद

‎बारिश की पहली बूँद उम्मीद दूसरी क्या होगी
‎जब होगी ढेर सारी बुँदे तब मोतियों की बर्षात् होगी
‎मोती मै समेट नही सकता देखा है मैने
‎हे खुदा बिखेर दिये तूने मोती अपने
‎महसूस किया हैं मैंने
‎कोशिश करू मैं तेरे मोती समेटने की
‎पर मोती को पानी बना दिया हैं तूने

‎पानी तो जिंदगी भी और मौत भी
‎जिंदगी मोती जैसी है मोती हूँ मैं
‎मोती क्यो समेटुं मैं तेरे जब पानी पीता हूँ मैं
‎चाह नहीं मुझे किसी मोती की क्योंकि मोती हूँ मैं
‎क्या वही थी बारिश की पहली बूँद
‎जिसको मैंने अभी पिया एक सीप हूँ मैं
‎समुंद्र की एक ऐसे सीप मोती बना दू तुझे भी मैं
‎क्योंकि तू ही तो हैं मेरा दर्पण
‎देखू मैं खुद को तुझमे मैं तुझको समर्पण

‎मोती तूने बिखेरे समेट लू मैं
‎मोती ऐसे पानी बन गए वे
‎पानी भर लू एक पात्र में
‎पानी को वाष्प बना कर
‎अपने पास ही ले आया तू
‎मोती तेरे तुझको ही अर्पण
‎मेरा जो है वो भी तुझको समर्पण
‎न कोई चाह न कोई इच्छा
‎एक तमन्ना तुझसे मुझे
‎एक आँख मोती बन जाऊ मैं तेरा जब
‎बारिश की पहली बूँद वही होगी क्या

‎         प्रेरणा- बर्षात के मोती

‎          Gaurav singh