"आख़िरी घंटी" 2D एनीमेशन वीडियो
Budget: ₹1,500 – ₹12,500 INR
i need 2d animation on following topic plz provide firstlt raw demo video on below story
https://www.youtube.com/watch?v=g5XHXSOmONk
5:06 PM
this is the youtube video link given for sam type of video to be made
“आख़िरी घंटी”
रात के 9:30 बजे थे। शहर के बाहर बना पुराना सरकारी स्कूल पूरी तरह सुनसान था। स्कूल कई सालों से रात में बंद रहता था, लेकिन अंदर से कभी-कभी हल्की रोशनी दिखाई देती थी।
कहते थे कि यहाँ एक लड़की की आत्मा भटकती है… जिसका नाम था राधा।
राधा इसी स्कूल की छात्रा थी। एक दिन अचानक उसकी मौत हो गई थी — और उसकी मौत का कारण आज तक कोई नहीं जान पाया। कुछ लोग कहते थे कि वह स्कूल की छत से गिर गई थी, कुछ कहते थे कि उसे किसी ने धक्का दिया था।
नया चौकीदार
कुछ महीनों बाद, स्कूल में नया चौकीदार आया — मोहन। वह साहसी था और उसे अंधविश्वास पर भरोसा नहीं था।
पहली ही रात उसे स्कूल में रुकना पड़ा। चारों तरफ अंधेरा था। सिर्फ एक टॉर्च और एक पुरानी कुर्सी उसके पास थी।
रात के 11 बजे अचानक…
“टिंग… टिंग…”
स्कूल की पुरानी घंटी अपने-आप बज उठी।
मोहन चौंक गया। उसने सोचा शायद हवा से हुआ होगा।
लेकिन स्कूल के अंदर से किसी के चलने की आवाज आने लगी —
टप… टप… टप…
मोहन ने टॉर्च उठाई और धीरे-धीरे अंदर गया।
कक्षा नंबर 5
आवाज़ कक्षा नंबर 5 से आ रही थी।
दरवाज़ा थोड़ा खुला हुआ था।
अंदर घुसते ही उसे महसूस हुआ कि तापमान अचानक गिर गया है। उसकी साँसें दिखाई देने लगीं।
उसने टॉर्च घुमाई…
डेस्क पर किसी ने चॉक से लिखा था:
“मैं अभी भी यहीं हूँ…”
मोहन के हाथ कांपने लगे।
अचानक पीछे से किसी लड़की की धीमी आवाज आई—
“मुझे अकेला मत छोड़ो…”
मोहन ने तुरंत पीछे मुड़कर देखा —
लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
दहशत
अगले ही पल कक्षा का दरवाज़ा अपने-आप बंद हो गया।
धड़ाम!
मोहन घबराकर दरवाज़ा खोलने लगा, लेकिन वह हिल भी नहीं रहा था।
तभी कमरे की लाइट अपने-आप जल गई।
और सामने…
कुर्सी पर एक लड़की बैठी थी।
सफेद यूनिफॉर्म, लंबे खुले बाल, और उसकी आँखें पूरी तरह काली थीं।
वह धीरे-धीरे बोली:
“मैं राधा हूँ…”
मोहन डर से पीछे हट गया।
सच
राधा ने बताया कि उस दिन कुछ बड़े लड़कों ने उसे छत पर बुलाया था। वे उसे डराना चाहते थे। धक्का-मुक्की में वह छत से गिर गई। लेकिन स्कूल ने मामला दबा दिया।
राधा की आत्मा अब भी न्याय चाहती थी।
उसने मोहन से कहा:
“जब तक सच सामने नहीं आएगा, मैं यहाँ से नहीं जाऊँगी…”
मोहन को समझ आ गया कि यह कोई सपना नहीं है।
आख़िरी घंटी
तभी फिर से स्कूल की घंटी बजने लगी।
टिंग… टिंग… टिंग…
राधा की आँखों से काले आँसू बहने लगे।
कमरा अचानक ठंडा हो गया। टॉर्च बंद हो गई।
अंधेरे में सिर्फ उसकी आवाज सुनाई दी—
“कल सुबह… सच सबको बताना…”
और फिर अचानक सब शांत हो गया।
दरवाज़ा खुल चुका था।
सुबह
मोहन पूरी रात सो नहीं पाया। अगली सुबह उसने स्कूल के प्रिंसिपल को पूरी बात बताई।
पहले तो किसी ने विश्वास नहीं किया। लेकिन जब कक्षा नंबर 5 में वही संदेश फिर से दीवार पर दिखाई दिया, तो सब हैरान रह गए।
जांच शुरू हुई।
कुछ दिनों बाद सच सामने आ गया। उन लड़कों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
शांति
उस शाम स्कूल के मैदान में एक छोटा-सा कार्यक्रम हुआ। राधा के नाम पर एक स्मारक बनाया गया।
जैसे ही मोहन ने वहां खड़े होकर कहा:
“अब तुम्हें इंसाफ मिल गया है…”
अचानक हवा तेज चली।
और स्कूल की घंटी आखिरी बार बजी…
टिंग…
उसके बाद कभी नहीं बजी।
कहते हैं, उस दिन के बाद राधा की आत्मा को शांति मिल गई।
लेकिन…
आज भी अगर कोई रात में उस स्कूल के पास से गुजरता है, तो कभी-कभी कक्षा नंबर 5 की खिड़की में एक सफेद साया दिखाई देता है…
और हल्की आवाज सुनाई देती है:
“धन्यवाद…”
https://www.youtube.com/watch?v=g5XHXSOmONk
5:06 PM
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“आख़िरी घंटी”
रात के 9:30 बजे थे। शहर के बाहर बना पुराना सरकारी स्कूल पूरी तरह सुनसान था। स्कूल कई सालों से रात में बंद रहता था, लेकिन अंदर से कभी-कभी हल्की रोशनी दिखाई देती थी।
कहते थे कि यहाँ एक लड़की की आत्मा भटकती है… जिसका नाम था राधा।
राधा इसी स्कूल की छात्रा थी। एक दिन अचानक उसकी मौत हो गई थी — और उसकी मौत का कारण आज तक कोई नहीं जान पाया। कुछ लोग कहते थे कि वह स्कूल की छत से गिर गई थी, कुछ कहते थे कि उसे किसी ने धक्का दिया था।
नया चौकीदार
कुछ महीनों बाद, स्कूल में नया चौकीदार आया — मोहन। वह साहसी था और उसे अंधविश्वास पर भरोसा नहीं था।
पहली ही रात उसे स्कूल में रुकना पड़ा। चारों तरफ अंधेरा था। सिर्फ एक टॉर्च और एक पुरानी कुर्सी उसके पास थी।
रात के 11 बजे अचानक…
“टिंग… टिंग…”
स्कूल की पुरानी घंटी अपने-आप बज उठी।
मोहन चौंक गया। उसने सोचा शायद हवा से हुआ होगा।
लेकिन स्कूल के अंदर से किसी के चलने की आवाज आने लगी —
टप… टप… टप…
मोहन ने टॉर्च उठाई और धीरे-धीरे अंदर गया।
कक्षा नंबर 5
आवाज़ कक्षा नंबर 5 से आ रही थी।
दरवाज़ा थोड़ा खुला हुआ था।
अंदर घुसते ही उसे महसूस हुआ कि तापमान अचानक गिर गया है। उसकी साँसें दिखाई देने लगीं।
उसने टॉर्च घुमाई…
डेस्क पर किसी ने चॉक से लिखा था:
“मैं अभी भी यहीं हूँ…”
मोहन के हाथ कांपने लगे।
अचानक पीछे से किसी लड़की की धीमी आवाज आई—
“मुझे अकेला मत छोड़ो…”
मोहन ने तुरंत पीछे मुड़कर देखा —
लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
दहशत
अगले ही पल कक्षा का दरवाज़ा अपने-आप बंद हो गया।
धड़ाम!
मोहन घबराकर दरवाज़ा खोलने लगा, लेकिन वह हिल भी नहीं रहा था।
तभी कमरे की लाइट अपने-आप जल गई।
और सामने…
कुर्सी पर एक लड़की बैठी थी।
सफेद यूनिफॉर्म, लंबे खुले बाल, और उसकी आँखें पूरी तरह काली थीं।
वह धीरे-धीरे बोली:
“मैं राधा हूँ…”
मोहन डर से पीछे हट गया।
सच
राधा ने बताया कि उस दिन कुछ बड़े लड़कों ने उसे छत पर बुलाया था। वे उसे डराना चाहते थे। धक्का-मुक्की में वह छत से गिर गई। लेकिन स्कूल ने मामला दबा दिया।
राधा की आत्मा अब भी न्याय चाहती थी।
उसने मोहन से कहा:
“जब तक सच सामने नहीं आएगा, मैं यहाँ से नहीं जाऊँगी…”
मोहन को समझ आ गया कि यह कोई सपना नहीं है।
आख़िरी घंटी
तभी फिर से स्कूल की घंटी बजने लगी।
टिंग… टिंग… टिंग…
राधा की आँखों से काले आँसू बहने लगे।
कमरा अचानक ठंडा हो गया। टॉर्च बंद हो गई।
अंधेरे में सिर्फ उसकी आवाज सुनाई दी—
“कल सुबह… सच सबको बताना…”
और फिर अचानक सब शांत हो गया।
दरवाज़ा खुल चुका था।
सुबह
मोहन पूरी रात सो नहीं पाया। अगली सुबह उसने स्कूल के प्रिंसिपल को पूरी बात बताई।
पहले तो किसी ने विश्वास नहीं किया। लेकिन जब कक्षा नंबर 5 में वही संदेश फिर से दीवार पर दिखाई दिया, तो सब हैरान रह गए।
जांच शुरू हुई।
कुछ दिनों बाद सच सामने आ गया। उन लड़कों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
शांति
उस शाम स्कूल के मैदान में एक छोटा-सा कार्यक्रम हुआ। राधा के नाम पर एक स्मारक बनाया गया।
जैसे ही मोहन ने वहां खड़े होकर कहा:
“अब तुम्हें इंसाफ मिल गया है…”
अचानक हवा तेज चली।
और स्कूल की घंटी आखिरी बार बजी…
टिंग…
उसके बाद कभी नहीं बजी।
कहते हैं, उस दिन के बाद राधा की आत्मा को शांति मिल गई।
लेकिन…
आज भी अगर कोई रात में उस स्कूल के पास से गुजरता है, तो कभी-कभी कक्षा नंबर 5 की खिड़की में एक सफेद साया दिखाई देता है…
और हल्की आवाज सुनाई देती है:
“धन्यवाद…”